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राफेल पर BJP का हल�ला बोल, राह�ल के खिलाफ देशभर में करेगी प�रदर�शन
Source:  आज तक
Friday, 15 November 2019 15:04

बीजेपी की मांग है कि कांग�रेस नेता राह�ल गांधी को देश से माफी मांगनी चाहि�. अब इसी मसले पर भाजपा देशव�यापी प�रदर�शन करने जा रही है, जिसका �जेंडा राह�ल गांधी से माफी मांगने की अपील करना होगा.

लता मंगेशकर की टीम का स�टेटमेंट, तबीयत में लगातार स�धार
Source:  Legend News
Friday, 15 November 2019 14:57

म�ंबई। स�र साम�राज�ञी लता मंगेशकर की तबीयत में लगातार स�धार आ रहा है। वह पिछले तीन दिनों से म�ंबई के ब�रीच कैंडी हॉस�पिटल में भर�ती हैं। सांस लेने में तकलीफ के बाद सोमवार को ही लता को आईसीयू में भर�ती किया गया था। 2 दिनों से उनकी हालत नाज�क बनी ह�ई थी। हालांकि अब उनके परिवार ने श�क�रवार को हेल�थ अपडेट जारी करते ह�� कहा है कि लता की तबीयत पहले से काफी बेहतर है।
लता मंगेशकर की टीम ने सà¥�टेटमेंट जारी करते हà¥�à¤� कहा, ‘हमें यह बताते हà¥�à¤� आपकी तरह ही खà¥�शी हो रही है कि आपकी पà¥�रारà¥�थनाओं और शà¥�भकामनाओं के साथ लता दीदी अब पहले से काफी बेहतर हैं।’
इससे पहले गà¥�रà¥�वार को लता मंगेशकर की फैमिली ने उनका हेलà¥�थ अपडेट जारी करते हà¥�à¤� कहा था, ‘लता दी की हालत पहले से काफी बेहतर और सà¥�थिर है। पà¥�रारà¥�थनाओं के लिà¤� सभी का धनà¥�यवाद। हम उनकी तबीयत में सà¥�धार की कामना करते हैं ताकि वह जलà¥�द घर लौट सकें। हमारे साथ रहने बने रहने के लिà¤� और हमारी निजता का समà¥�मान करने के लिà¤� आप सभी का आभार।’
इससे पहले इंटरनल मेडिसिन फिजिशन डॉकà¥�टर पà¥�रतित समदानी ने बताया था कि लता मंगेशकर के बाà¤�ं वेंटà¥�रिकà¥�लर में समसà¥�‍या है और वह नà¥�यूमोनिया से भी पीड़ित हैं। उनकी हालत नाजà¥�क है लेकिन कà¥�छ सà¥�धार जरूर हà¥�आ है।
डॉकà¥�‍टरों का कहना है कि लेफà¥�ट वेंटà¥�रिकल सबसे जà¥�‍यादा हारà¥�ट की पमà¥�पिंग पावर की सपà¥�‍लाइ करता है और नॉरà¥�मल फंकà¥�‍शन के लिà¤� यह सबसे जà¥�‍यादा जरूरी है। इस हालत में दिल के बाà¤�ं हिसà¥�‍से को जà¥�‍यादा काम करना होता है। बà¥�रीच कैंडी हॉसà¥�पिटल ने लता की तबीयत के बारे में इससे जà¥�यादा जानकरी नहीं दी है।
-�जेंसियां

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महाराष��ट�र में सा�ा सरकार का रास�ता साफ
Source:  Daily Hindi News
Friday, 15 November 2019 14:57

मà¥�ंबई (डेली हिंदी नà¥�â€�यूज़)। महाराषà¥�टà¥�र में नà¥�यूनतम साà¤�ा कारà¥�यकà¥�रम पर सहमति बनने के बाद अब शिवसेना, à¤�नसीपी और कांगà¥�रेस की साà¤�ा सरकार का रासà¥�ता तकरीबन साफ नजर आ रहा है। जलà¥�द ही तीनों पारà¥�टियों के नेता राजà¥�â€�यपाल भगत सिंह कोशà¥�यारी से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं। सरकार गठन को लेकर दिलà¥�ली […]

जनसंख�या कैसे थमेगी ? | EDITORIAL by Rakesh Dubey
Source:  Bhopal Samachar
Friday, 15 November 2019 14:57

नई दिल�ली। ‘बच�चे दो ही अच�छे’ और ‘हम दो हमारे दो’ जैसे नारे सिर�फ नारे ही रह गये। परिवार नियोजन के लि� लोगों को प�रेरित करने के इरादे से क�छ राज�यों ने पंचायत स�तर पर दो संतान वाले व�यक�तियों को ही च�नाव लड़ने की पात�रता देने का कानून बनाया। हरियाणा द�वारा बनाये गये कानून पर उच�चतम न�यायालय ने भी अपनी म�हर लगाई थी। असम सरकार ने हाल ही में ‘हम दो हमारे दो’ के सिद�धांत पर अमल करते ह�� सिर�फ उन�हीं लोगों को सरकारी नौकरी देने का निर�णय लिया है, जिनके दो संतानें हैं। वैसे तो यह निर�णय �क जनवरी, 2021 से लागू होगा। असम सरकार की मंशा साफ है, अगर दो से अधिक बच�चे ह�� तो सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। मध�यप�रदेश जैसे क�छ राज�य भी सी प�रकार की नीति पर विचार कर रहे हैं |

केंद�र सरकार असम में लागू दो संतानों का पैमाना लागू करने के निर�णय के बहाने इस पर होने वाली प�रतिक�रिया जानना चाहती है । न�यायपालिका भी देश में ब�ती आबादी और तेजी से कम हो रहे संसाधनों पर चिंता व�यक�त कर च�की है। हरियाणा में दो से अधिक संतान वाले व�यक�ति को पंचायत च�नाव लड़ने के अयोग�य घोषित करने संबंधी कानून को वैध ठहराते ह�� 2004 में उच�चतम न�यायालय ने भी अपने फैसले में कहा था कि देश में तेजी से ब� रही आबादी पर कानून के माध�यम से अंक�श लगाना राष�ट�र हित में है। न�यायालय ने �क अन�य मामले में तो यहां तक कहा था कि यदि तीसरी संतान को गोद दे दिया जाये तो भी �सा व�यक�ति च�नाव लड़ने के अयोग�य होगा। इसके बावजूद जनसंख�या निरंतर ब� रही है |

ब�ती आबादी का ही नतीजा है कि पूरे देश में रहने, खाने और रोजगार जैसी मूलभूत जरूरतों का अभाव ब�ता ही जा रहा है। आवास की समस�या और अन�य जरूरतों को पूरा करने के लि� ताल-तलैयों पर कब�जा, वन क�षेत�रों में कब�जा और अवैध तरीके से वनों की कटाई हो रही है, जिसने देश के सामने स�वच�छ हवा की गंभीर समस�या पैदा कर दी है।
पंचायत स�तर के च�नावों की तरह ही संसद और विधानमंडलों के च�नावों में भी दो संतानों का फार�मूला लागू कराने के लंबे समय से प�रयास हो रहे हैं, लेकिन इसमें अभी तक सफलता नहीं मिल सकी है। देश में तेजी से खत�म हो रहे प�राकृतिक संसाधनों को लेकर हर मंच पर चिंता व�यक�त की जा रही है। यह मांग हो रही है कि जनसंख�या पर नियंत�रण के लि� कानून में संशोधन किया जाये और संविधान के कामकाज की समीक�षा के लि� गठित न�यायमूर�ति �म.�न. वेंकटचलैया आयोग के स��ाव के अन�रूप सविधान में अन�च�छेद 47-A जोड़ा जाये।

जनसंख�या नियंत�रण के लि� कानून में संशोधन करके तीसरी संतान को मतदान के अधिकार और सरकारी नौकरी से वंचित करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। इस मांग की �क वजह संविधान के कामकाज की समीक�षा करने वाले न�यायमूर�ति �म.�न. वेंकटचलैया आयोग का वह स��ाव भी है, जिसमें सविधान में अन�च�छेद 47-A जोड़ने की बात कही गयी थी। इस बाबत �क मामला दिल�ली उच�च न�यायालय में लंबित है। तर�क दिया गया है कि देश में बेरोजगारी, गरीबी, लगातार ब� रहे बलात�कार, घरेलू हिंसा, संगीन अपराधों, प�रदूषण तथा जल, स�वच�छ वाय�, जंगल और अन�य संसाधनों के तेजी से खत�म होने की म�ख�य वजह ब�ती आबादी है। इस पर नियंत�रण पाये बगैर ‘स�वच�छ भारत’ और ‘बेटी बचाओ’ जैसे अभियान भी पूरी तरह सफल नहीं हो पायेंगे।

इस याचिका में परिवार नियोजन के नियमों को सख�ती से लागू करने पर जोर दिया गया था। इनमें सरकारी नौकरियों, सब�सिडी और मदद के लि� दो संतानों का मानक निर�धारित करने की बात कही गई थी। इसका पालन नहीं करने वोट देने, च�नाव लड़ने, संपत�ति, आवास और म�फ�त कानूनी सहायता जैसे विधायी अधिकार वापस लेने का सरकार को निर�देश देने का अन�रोध किया था। जनसंख�या पर नियंत�रण के उद�देश�य से नरसिंह राव सरकार के कार�यकाल में 79वां संविधान संशोधन विधेयक राज�यसभा में पेश किया गया था। इसमें प�रस�ताव किया गया था कि दो से अधिक संतानों वाला व�यक�ति संसद के किसी भी सदन या राज�यों के विधानमंडल का च�नाव लड़ने के अयोग�य था।

इस समय, दो संतानों का फारà¥�मूला पंचायत सà¥�तर के चà¥�नावों के लिà¤� कà¥�छ राजà¥�यों में लागू है। इनमें हरियाणा, राजसà¥�थान, उतà¥�तर पà¥�रदेश, पंजाब, मधà¥�य पà¥�रदेश, आंधà¥�र पà¥�रदेश और ओडिशा सहित कई राजà¥�य शामिल हैं। सरकारी नौकरियों में दो संतानों का फारà¥�मूला लागू करने के असम सरकार के निरà¥�णय के बाद जनसंखà¥�या नियंतà¥�रण के बारे में केनà¥�दà¥�र सरकार के साथ ही दूसरे राजनीतिक दलों दà¥�वारा शासित राजà¥�यों का रà¥�ख देखना दिलचसà¥�प होगा। 
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श�री राकेश द�बे वरिष�ठ पत�रकार �वं स�तंभकार हैं।
संपर�क 9425022703
rakeshdubeyrsa@gmail.com
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INX मीडिया केस में पी चिदंबरम को बड़ा �टका, दिल�ली हाईकोर�ट से नहीं मिली जमानत - NDTV Khabar
Source:  Google समाचार
Friday, 15 November 2019 14:55

  1. INX मीडिया केस में पी चिदंबरम को बड़ा à¤�टका, दिलà¥�ली हाईकोरà¥�ट से नहीं मिली जमानत  NDTV Khabar
  2. INX मीडिया केस में Delhi HC फैसला सà¥�नाà¤�गी | P. Chidambaram की जमानत पर आज फैसला आà¤�गा  News18 India
  3. INX केस: पी चिदंबरम को à¤�टका, दिलà¥�ली HC ने खारिज की जमानत याचिका  à¤†à¤œ तक
  4. टॉप 10 नà¥�â€�यूज: कांगà¥�रेस नेता चिदंबरम की जमानत याचिका पर आज आ सकता है कोरà¥�ट का फैसला; पढ़ें देश और दà¥�निया की पà¥�रमà¥�ख खबरें  Hindustan
  5. INX MEDIA CASE: चिदंबरम को नही मिली राहत, दिलà¥�ली HC ने खारिज की जमानत याचिका  News18 हिंदी
  6. Google समाचार पर पूरी खबर देखें

पॉल�यूशन पर मीटिंग से गैरहाजिर गंभीर इंदौर में चख रहे जलेबी, AAP हमलावर
Source:  आज तक
Friday, 15 November 2019 14:55

बैठक में ना पह�ंचने वालों में बीजेपी के सांसद और पूर�व क�रिकेटर गौतम गंभीर भी रहे, अब इसी मसले पर आम आदमी पार�टी ने उनपर निशाना साधा है. AAP ने पूछा है कि क�या प�रदूषण को लेकर गंभीरता कमेंट�री बॉक�स तक ही सीमित है?

अखबार प�ने की कला
Source:  Legend News
Friday, 15 November 2019 14:55

किस भी कार�य को सम�पादित करने में जो तथ�य सबसे महत�वपूर�ण भूमिका अदा करती है,वह है-र�चि। यदि आपकी र�चि संगीत स�नने में है तो आप स�वयं ही अपने व�यस�त दिनचर�या में भी उसके लि� समय निकाल ही लेंगे। बस में, ट�रेन में, मेट�रो में या फिर रोड पर चलते ह�� भी आप हेडफोन लगाकर ऑफिस पह��चने के क�रम में और ऑफिस के बाद घर पह��चने के दौरान संगीत का ल�त�फ़ उठा ही लेंगे। कतिपय सामान अवयव काम आती है अखबारों को प�ने के प�रति लगाव पैदा करने में। यदि �क बार र�चि पैदा हो गई तो आप �क दिन में �क ही नहीं कई अखबार प� जा��गे और स�वयं को ज�ञान से परिपूर�ण महसूस करेंगे।

जो वà¥�यकà¥�ति अखबार पà¥�ने की शà¥�रà¥�आत कर रहा है उसे अपनी रूचियों का पता होना आवशà¥�यक है। यदि किसी को खेल में रà¥�चि है तो वह खेल के खबर को ही रोज़ पà¥�ना शà¥�रू करे। यदि किसी को फिलà¥�मों में रà¥�चि है तो फ़िलà¥�मी खबर और किसी को राजनीति में रà¥�चि है तो राजनीति की तमाम ख़बरों को पà¥�कर अखबार पà¥�ने के आदत को विकसित कर सकता है। धीरे-धीरे अनà¥�य ख़बरों की तरफ भी धà¥�यान खà¥�द–ब -खà¥�द जाने लगता है। जैसे कि यदि कोई वà¥�यकà¥�ति,खेल का पà¥�रेमी है तो शà¥�रू में वह शà¥�दà¥�ध खेल के ख़बरों तक ही सीमित रहता है। बाद में वह अपने पà¥�रिय खिलाडी के जीवन से जà¥�डी बातें जैसे कि उसकी शादी किसी अभिनेतà¥�री से हà¥�ई है तो वह फ़िलà¥�मी ख़बरों की तरफ भी बà¥�ना शà¥�रू करता है। यदि उसके पà¥�रिय खिलाड़ी ने कोई टीम खरीदी है तो वह वà¥�यापार की ख़बरों को भी तवजà¥�जो देना शà¥�रू करता है।  यदि खिलाड़ी किसी राजनितिक पारà¥�टी से जà¥�ड़ जाता है तो उसका धà¥�यान राजनीतिक हलचलों की तरफ भी जाने लगता है ।और यदि खिलाड़ी किसी चैरिटेबल संसà¥�था या शैकà¥�षिक संसà¥�था से जà¥�ड़ा हो तो पाठक साहितà¥�यिक और विविध ख़बरों से भी रू-ब-रू होना शà¥�रू करता है। इस तरह कà¥�रमानà¥�सार à¤�क नवोदित पाठक समà¥�पूरà¥�ण अखबार पà¥�ने लगता है।

मेरी पà¥�रारंभिक शिकà¥�षा (वरà¥�ग 6 से 12 तक ) तिलैया डैम के हà¥�रदय में बसे सà¥�कूल -सैनिक सà¥�कूल तिलैया ,कोडरमा डैम से पूरà¥�ण हà¥�ई। मेरा नामांकन इस पà¥�रतिषà¥�ठित विदà¥�यालय  में 16 अगसà¥�त 1997 में हà¥�आ और यहीं से अखबार को पà¥�ने की सही शà¥�रà¥�आत हà¥�ई। हालाà¤�कि पहले अखबारों में फ़िलà¥�मी हीरो-हीरोईन की तसà¥�वीरें  दिखने और उनकी कटिंग करना ही हमारे लिà¤� अखबार पà¥�ना होता था। लेकिन सैनिक सà¥�कूल में हर हॉसà¥�टल में सिरà¥�फ अंगà¥�रेजी अखबार आते थे ताकि हमारी अंगà¥�रेज़ी भाषा ठीक हो सके।  इसके लिà¤� à¤�क और क़ानून था -इंगà¥�लिश सà¥�पीकिंग कारà¥�ड। रात को सोने से पहले जो छातà¥�र हिंदी बोलता हà¥�आ पकड़ा जाता था उसे यथोचित दणà¥�ड भà¥�गतना पड़ता था।  और सैनिक सà¥�कूल का यथोचित दंड इतना जà¥�यादा होता था की हर छातà¥�र उससे बचने की कोशिश में इंगà¥�लिश  बोलने की भरपूर कोशिश करता था। हालाà¤�कि इसका तोड़ भी मिल गया था कि 10 छातà¥�रों के समूह में हर छातà¥�र नियत दिन पर हिंदी बोल दे ताकि à¤�क ही छातà¥�र दंड का भागी ना बनता रहे।  पर इसके बावजूद भी, यह तरीका इंगà¥�लिश सिखाने का à¤�क अचà¥�छा तरीका कहा जा सकता था। मेरे छातà¥�रावास पाटलिपà¥�तà¥�र में अंगà¥�रेज़ी अखबार “द टाइमà¥�स ऑफ़ इंडिया ” आता था। सीनियरà¥�स के पà¥�ने के बाद सबसे बाद में हमारे पास यह अखबार आता था।  हमारे पास पहà¥�à¤�चते-पहà¥�à¤�चते समà¥�पादकीय ,देश-विदेश की ख़बरों वाला पनà¥�ना लाल-पीले इंक से भरा होता था। चूà¤�कि सीनियरà¥�स अखबारों से खबरें निकाल कर उसे डिबेट और डिसà¥�कशन में इसà¥�तेमाल करते थे इसलिà¤� अखबारें रंगीन हो जाया करती थीं। जो पनà¥�ना सबसे साफ़ और पà¥�ने लायक बचता था वो था खेल और फ़िलà¥�मी ख़बरों का और मà¥�à¤�े इन दोनों में ही रà¥�चि थी। मैं रात के लगभग 9 बजे अपने उन ख़बरों को पà¥�ने के कà¥�रम में कठिन 5 शबà¥�दों के अरà¥�थ भी अलग से लिखता जाता और उसे इसà¥�तेमाल करने की भी कोशिश करता। उस समय फ़िलà¥�मी ख़बरों को पà¥�ते-पà¥�ते मैंने scintillating,ravishing,titillating ,खेल के पृषà¥�ठों से catch-22 position,menacing,death-defying जैसे शबà¥�दों को सीखा और आज तक यह मेरे जहन में जà¥�यों के तà¥�यों बसी हà¥�ई हैं। इसी तरह से नà¤� शबà¥�द सीखते-सीखते आलम यह हà¥�आ कि मैंने जब à¤�क सीनियर की डायरी लिखी तो अनेक शबà¥�दों के अरà¥�थ जानने के लिà¤� उनà¥�हें मà¥�à¤�े बà¥�लाना पड़ा।हालाà¤�कि यह उनकी कहीं-न-कहीं हार थी या नहीं पता नहीं पर मेरी जीत जरूर थी।

2011 में मैंने दिल�ली में वाजीराम �न�ड रवि में सिविल सेविसेस की कोचिंग की। वहा� शिक�षकों ने अखबार को वैज�ञानिक ढंग से प�ने की बात बताई। अभी तक मैं अखबार को अपने दिनचर�या में शामिल कर च�का था लेकिन अब अखबार को बाइबिल की तरह प�ने की बारी थी। इस तरह की परीक�षाओं में क�छ भी पूछा जा सकता था। अतः हरेक पेज जो ध�यान से प�ते ह��,अंडरलाइन करते ह�� उसकी कटिंग करके स�क�रैप ब�क भी बनाना पड़ता है। हाला�कि 5-6 स�क�रैप ब�क मैंने वर�ग 10 तक खिलाड़ियों के फोटो के तैयार कर लि� थे लेकिन वह सिर�फ मेरे  मनोरंजन के लि� था लेकिन अब बात �ग�जाम क�लियर करने की थी। अखबार को प�ने का वक़�त तय था-गाड़ी में आते और जाते ह��। कोचिंग के लि� आते ह�� सम�पादकीय ,देश-विदेश की खबरें और वापस जाते ह�� बाकी ख़बरों को प� लेना होता था।  और यकीन मानि� यह सिलसिला 8 महीनों तक इस खूबसूरती से चला कि किसी भी दिन का अखबार प�े बिना छूटा नहीं और परीक�षा से पहले बेहतरीन स�क�रैप ब�क भी तैयार हो गई। इस स�क�रैप ब�क ने 2016 के सिविल सर�विसेज में कमाल ही कर दिया।  उस साल प�रारंभिक परीक�षा में लगभग 60 प�रतिशत सवाल करेन�ट अफेयर�स से आ� थे और वो साड़ी खबरें मैंने स�क�रैप ब�क में कइओं बार प� रखे थे।  परिणाम यह ह�आ कि म��े उस साल प�रारंभिक परीक�षा के सबसे बेहतरीन अंक प�राप�त ह�� और मैं म�ख�य परीक�षा के लि� क�वालीफाई हो गया था। वैज�ञानिक ढंग से अखबार प�ना कब मेरी दिनचर�या का हिस�सा बन गया और म��े इतना फायदा पह��चा गया,म��े पता भी नहीं चला।

हर उम�र में अखबार प�ने का कारण अलग होता है। बचपन में मनोरंजन के लि�,य�वावस�था में परीक�षा निकालने के लि� और वृद�धावस�था में समय ग�जारने के लि�। हाला�कि कारण जो भी हो, अखबारों को तरीके से प�ने से यह हर उम�र के व�यक�ति को लाभान�वित करता है।

– सलिल सरोज
कार�यकारी अधिकारी
लोक सभा सचिवालय
संसद भवन
नई दिल�ली

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रैनबैक�सी के मलविंदर, शिविंदर की बर�बादी की कहानी
Source:  Hindi Economic times
Friday, 15 November 2019 14:53

नई दिल�ली स�प�रीम कोर�ट ने श�क�रवार को देश की दिग�गज दवा कंपनी के पूर�व प�रमोटर भाइयों मलविंदर और शिविंदर सिंह को जापानी कंपनी केस में अवमानना का दोषी पाया है। दवा बनाने वाली दाइची सांक�यो ने 3,500 करोड़ र�पये नहीं च�काने पर सिंह बंध�ओं के खिलाफ स�प�रीम कोर�ट में याचिका दाखिल की थी। दाइची ने स�प�रीम कोर�ट से ग�हार लगाई थी कि वह सिंह बंध�ओं से ट�राइब�यूनल के आदेश का पालन करवा�। आइ�, दोनों भाइयों के कारोबारी द�निया में अब तक के सफर पर �क नजर डालते हैं। 1. आजादी से पहले रणजीत और ग�रबक�स नाम के दो चचेरे भाइयों ने मिलकर दवाओं के डिस�ट�रिब�यूशन की �क कंपनी की श�र�आत की। रणजीत के नाम का श�र�आती अक�षर और ग�रबक�स के नाम के आखिरी अक�षरों (Ran+Bax) को मिलाकर इसका नाम रैनबैक�सी पड़ा। लेकिन, सन 1947 में उन�होंने यह कंपनी मोहन सिंह को बेच दी। उनके बाद उनके बेटे परविंदर सिंह ने कंपनी की कमान संभाली और इसने खूब तरक�की की। साल 2000 में परविंदर सिंह के निधन के बाद उनके दोनों बेटे मलविंदर और शिविंदर ने कंपनी का जिम�मा संभाल लिया। पढ़ें : 2. दोनों भाइयों की बर�बादी की कहानी साल 2008 में श�रू ह�ई, जब उन�होंने रैनबैक�सी में अपनी हिस�सेदारी जापान की कंपनी दाइची सांक�यो को 9,576 करोड़ र�पये में अपनी हिस�सेदारी बेच डाली। इससे मिले पैसों में से उन�होंने साल 2009-10 में 2,000 करोड़ र�पये कर�ज और टैक�स च�काने में खर�च कि�। वहीं, 1,700 करोड़ र�पये अपन गैर-बैंकिंग वित�तीय कंपनी रेलिगेयर में और 2,230 करोड़ र�पये अपने हॉस�पिटल चेन फोर�टिस में निवेश किया। 3. दाइची से मिले पैसों में से उन�होंने साल 2009-11 में 2,700 करोड़ र�पये ब�यास सत�संग चलाने वाले ग�रिंदर सिंह ढिल�लो उर�फ बाबाजी के परिजनों और सत�संग ब�यास ट�रस�ट के लोगों को दि�। 2009-14 में ढिल�लो परिवार ने पैसे रियल �स�टेट में लगा दि�, लेकिन तभी मंदी आ गई और मकानों के दाम गिरने से उन�हें भारी घाटा ह�आ। पढ़ें : 4. रेलिगेयर तथा फोर�टिस ने भी साल 2010-14 में अपना विस�तार किया, लेकिन मंदी आने से भारी कर�ज हो गया। अप�रैल 2010 में मलविंदर तथा शिविंदर सिंह को रेलिगेयर के बोर�ड से निकाल दिया गया। 5. इधर, साल 2012 में दाइची ने सिंगाप�र के इंटरैनशल कोर�ट ऑफ आर�बिट�रेशन में की गई अपनी अपील में कहा कि दोनों भाइयों ने उन�हें रैनबैक�सी डील में धोखा दिया है, क�योंकि डील के क�छ दिनों बाद ही अमेरिका ने रैनबैक�सी की दवाओं के आयात पर यह कहते ह�� रोक लगा दिया था कि उनकी दवा�ं ग�णवत�ता वाली नहीं हैं। 6. इंटरनैशनल कोर�ट ऑफ आर�बिट�रेशन ने दोनों भाइयों के खिलाफ फैसला स�नाते ह�� उन�हें दाइची को 50 करोड़ डॉलर हर�जाना देने का आदेश दिया। पढ़ें : 7. इस बीच, ज�लाई 2016 में दोनों भाइयों के बेहद करीबी और रेलिगेयर के सी�मडी स�नील गोधवानी ने अपने पद से इस�तीफा दे दिया। इस साल दोनों भाइयों पर क�ल 13,000 करोड़ र�पये का कर�ज हो गया था। 8. कर�जदारों का कर�ज च�काने के लि� नवंबर 2016 में मलविंदर ने कथित तौर पर फोर�टिस से 473 करोड़ र�पये ट�रांसफर कि�, जिसकी जांच ह�ई। इसके बाद अगस�त 2018 में बकाया न च�काने पर लेनदारों ने फोर�टिस तथा रेलिगेयर में इक�विटी की मांग की, जिसके बाद दोनों कंपनियों पर दोनों भाइयों का नियंत�रण समाप�त हो गया। 9. दोनों भाइयों ने अगस�त 2018 में गोधवानी पर आरोप लगाते ह�� कहा कि उन�होंने बिना बता� कई ट�रांजैक�शंस कि� और उन�हें कर�ज के जाल में फंसाकर चले ग�। दोनों भाई ग�र�प की कंपनियों में अपनी हिस�सेदारी बेचकर कर�जा च�काने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन दाइची सांक�यो ने इसके खिलाफ अपील कर दी। दिल�ली हाई कोर�ट ने इस केस में दोनों भाइयों को फटकार लगाते ह�� कहा कि उन�होंने अदालत को ग�मराह किया है और कोर�ट ने दोनों के सारे बैंक खाते भी सील कर दि�। 10. शिविंदर ने अपने बड़े भाई मलविंदर और गोधवानी पर सितंबर 2018 में उत�पीड़न, जालसाजी तथा क�प�रबंधन का आरोप लगाया और कहा कि वे अपने भाई से अलग हो रहे हैं। वित�तीय घोटाला करने के आरोप में 10 अक�टूबर, 2019 को दोनों भाइयों को प�लिस ने गिरफ�तार कर लिया।

पलूशन: दिल�ली में बैठक छोड़ इंदौर में दिखे गंभीर
Source:  Navbharat Times
Friday, 15 November 2019 14:51


�ारखंड में 19 साल तक चली भाजपा और आजसू की दोस�ती टूटने के कगार पर!
Source:  Khaskhabar
Friday, 15 November 2019 14:48

�ारखंड बनने के बाद से करीब 19 सालों तक भारतीय जनता पार�टी (भाजपा) और ऑल �ारखंड स�टूडेंट यूनियन (आजसू) के बीच

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